युवा शक्ति के नाम

सपने तुमको बहकायेंगे, लेकिन सपनों में खोना मत। संकट आयेंगे जायेंगे, हर एक बात पर रोना मत।   यदि थोड़े झंझावातों से , पथ छोड़ोगे, डर जाओगे। घुटने टेके , बन गये भीरु तो बिना मौत मर जाओगे ।।  …

हिंदी दिवस : सुपावन हिंदी भाषा है

हिंदी गाये मंगलगान, गान से आकर्षित हो  ध्यान ध्यान में झूमे हिंदुस्तान,   यही सबकी अभिलाषा है। सुपावन हिंदी भाषा है।   जोड़ रही जो मानवता को, तोड़ रही कुप्रथाएं लय, गति ,उत्ताल तरंगे मन को छू-छू जाएँ।। मिला है…

एक दीपक मैं जलाऊँ, एक दीपक तुम जलाओ

एक दीपक मैं जलाऊँ, एक दीपक तुम जलाओ !!   तुम तमस में रोशनी हो भोर की उजली किरण हो इस अधूरी जिंदगी का इक समूचा व्याकरण हो पृष्ठ पर मन की ऋचाओं का सरलतम उद्धरण हो भाव के अनुकूल…

कविता ज़िंदाबाद

कविता जिन्दाबाद हमारी कविता जिन्दाबाद !!   ये बोली  तो युग बोला  ये गायी तो  सबने गाया इसने ही आजादी का परचम सीमा पर लहराया वंदे मातरम बन कर गूंजी और तिरंगा थाम लिया बिस्मिल शेखर भगत सिंह मंगलपांडे का…

मरते दम तक भी गाएंगे गाथा हिंदुस्तान की

मरते दम तक भी गाएंगे गाथा हिंदुस्तान की !!   उन्नत जहां ललाट किरीट का सागर चरण पखारे है ऊंचे – ऊंचे मंदिर –  मस्जिद, गिरजाघर गुरु द्वारे हैं सब धर्मों का  मान और   सम्मान जहां  थाती  है जहां  बेटियां …

प्यासे प्यासे मेरे मछुआरे नयन

झुके कारे करारे शरारे नयन जैसे सागर में दो तैरती मछलियां प्यासे प्यासे मेरे मछुआरे नयन …!!   चूम लूं रंग से मैं तेरे गाल को छू के देखूं जरा रेशमी बाल को ये कलाई तेरी डाल कचनार की खिले…

मुक्तक

1. लड़की दिल से तहस नहस निकली बात निकली तो फिर बहस निकली उसकी नफ़रत में प्यार शामिल था आपके प्यार   में  हवस  निकली 2. अपने संयम की परीक्षा कर रहा हूं प्रेम व्याकुल है समीक्षा कर रहा हूं बैठकर…

हे प्रभू

लालू, सतीश मुझको तू बलराम बना दे। तुझको कसम है शीला व सुखराम बना दे।   संसद की शोभा गर यहां फूलन से बढ़ रही। मुझको मेरे भगवान तू मलखान बना दे।   चरणों की अपने भक्ति ऐसी देना हे…

एक चोर की प्रार्थना

अरे गोकुल के छोरे, सुनो नट नागर मोरे। माखन के चोर मोरे, सुनो चितचोर मोरे। अरे ओ नंदकिशोरे, आया मैं द्वार तोरे। मेरी बिगड़ी बना दे, मुझमे वो हुनर ला दे। चोरों की लिस्ट में, सबसे ऊपर बिठा दे।  …

हमारे बारे में

हिंदी साहित्य की वाचक परंपरा कवि-सम्मलेन, जिसका उद्देश्य समाज का दर्पण होकर उसे उसके गुणों एवं अवगुणों से परिचित करवाते हुए एक उचित दिशा प्रदान करना है। कवि-सम्मलेन की ये परंपरा लम्बे समय से सामजिक चेतना का ये कार्य करती आ रही है। इसी परंपरा को सहेजने और संवारने का कार्य करने के उद्देश्य से हमने यह माध्यम तैयार किया है।

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