गुरुजी की क्लास

भ्रष्टाचार रोकने को आयोग बिठाया गया, आयोग ने योग दान  दिया भ्रष्टाचार में।   आयोग की जांच करने को कमेटी बिठाई , कमेटी ने ऐंठ ली रकम शिष्टाचार में।   कमेटी के ऊपर बिठाया जांच कमीशन, कमीशन, कमीशन खा गया…

उधार का कभी व्यवहार नहीं रखना

गुरुजी बोले कि बेटा टूटा हुआ दरपन बंद  घड़ी घर की दीवार नहीं रखना ।   याद रखो एक बात संकट में छोड़े साथ हाथ में कभी वो हथियार नहीं रखना ।   धन वाले ऋण का न लेन देन…

प्रेमिका ने किया ब्लॉक

प्रथम प्रपोज में ही हुए होज पोज हम प्यार का इरादा पूरा खाक कर दिया है।   भाई साब भैय्या जी व अंकल जी बोल बोल नाज़ुक नरम दिल शॉक कर दिया है।   फेसबुक वाट्सऐप   पर न मेसेज कोई…

प्रेम की अर्थव्यवस्था (छंद)

प्रेमी बोला डार्लिंग डॉलर सी फूल रही मेरा हाल भारतीय रुपैये सम्मान है।   बिछाने को धरती पे अखबार बस यार ओढ़ने के नाम पर खुला आसमान है ।   लंच आश्वासन का डिनर में भाषण है ब्रेकफास्ट पै है…

कुंवारे प्रेमी की पीड़ा

तुम्हारे तो भाव काजू  बादाम से बढ़ गए छुंआरे थे तो हम छुंआरे रह गये हम।   तुम्हारी तो किस्मत जोर मार गई जानू किस्मत के मारे थे मारे रह गये हम   तुमने तो घर बार अपना बसा लिया…

कोरोना वायरस (छंद)

एक वायरस ने ही जीवन नीरस  किया सारा रस जीवन का नाली में फिका दिया।   मौत तक मेड इन चाईना हो गई यार दीवारों पे इश्तहार जग में लिखा दिया ।   ऐसा ढाया कहर कि कोरोना ने सबको…

अपराध रोकने की कोशिशें (छंद)

अपराध रोकने की कोशिशें हज़ार हुई रोके नहीं रुके  और ज्यादा बढ़ गए  हैं।   अपराधी पकड़ने गये थे पुलिस वाले खुद अपराधियों के हत्थे चढ़ गए हैं।   मढ़ने चले थे दोष दूसरों के माथे पर हाय हाय खुद…

विकलांग वर्ष

सन बियांसी की बात करीब आधी रात। कम्पीटिशन की तैयारी कर रहा था। जनरल नॉलेज की किताब पढ़ रहा था। मेरे बीस साल की उम्र में मेरे पिताजी ने कभी नहीं मारा। बड़ी से बड़ी गलती पर प्यार से समझाया…

श्रीमती जी और मैं (हास्य कविता)

शारीरिक , मानसिक , आर्थिक परेशानियों से हैरान परेशान। हम दोनों पति पत्नी एक पंडित जी के पास पहुंचे कि श्री मान। है कोई इन समस्याओं का समाधान। पंडित जी बोले रे नादान। सूर्य अस्त है , मंगल अमंगलकारी है…

क्या कहूँ इस दौर का इंसान कैसा हो गया है

क्या कहूँ  इस दौर  का  इंसान कैसा हो गया है। अब हवाओं का भी रुख तूफ़ान जैसा हो गया है।   बीस  दंगे  कत्ल बाइस  लूट की गिनती नही है, उसका भी सम्मान अब सम्मान जैसा हो गया है।  …

हमारे बारे में

हिंदी साहित्य की वाचक परंपरा कवि-सम्मलेन, जिसका उद्देश्य समाज का दर्पण होकर उसे उसके गुणों एवं अवगुणों से परिचित करवाते हुए एक उचित दिशा प्रदान करना है। कवि-सम्मलेन की ये परंपरा लम्बे समय से सामजिक चेतना का ये कार्य करती आ रही है। इसी परंपरा को सहेजने और संवारने का कार्य करने के उद्देश्य से हमने यह माध्यम तैयार किया है।

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