दूर मुँह से हुये निवाले हैं

दूर मुँह से हुये निवाले हैं पड़ गये ज़िन्दगी के लाले हैं।   हर तरफ़…

ऐ दिलो जान मेरी जान बचाने आजा

ऐ दिलो जान मेरी जान बचाने आजा। आज झूँठा हि सही प्यार जताने आजा ।…

दर्द सीने में दबाकर मुस्कुराना ही पड़ा

दर्द  सीने  में  दबाकर  मुस्कुराना   ही पड़ा और रस्मन महफ़िलों में गुनगुनाना ही पड़ा।।  …

क्या कहूँ इस दौर का इंसान कैसा हो गया है

क्या कहूँ  इस दौर  का  इंसान कैसा हो गया है। अब हवाओं का भी रुख…

शौहर मेरे

इतने  ज्यादा हुस्न  से भरपूर  हैं शौहर मेरे। अपनी सुन्दरता में बिल्कुल चूर हैं शौहर…

ख़यालों में मेरे उससे कोई बेहतर नहीं आता

न जाने क्या हुआ अब वो हमारे घर नही आता। ख़यालों में मेरे उससे कोई…

कोरोना आ गया

उसकी हालत देख करके मुझको रोना आगया। यूँ  लगा  फिर  जैसे  कोई   जादू  टोना  आगया।…

गज़ब के लोग हैं मेरी कमाई चाट लेते हैं

गज़ब  के  लोग  हैं  मेरी  कमाई  चाट लेते हैं। मेरे  हर  एक  रुपए  में  वो …

चोरों में चौकीदार की इज्जत नहीं रही

उस नेक से किरदार की इज्जत नही रही। चोरों में चौकीदार  की  इज्जत  नही रही।…

ख़ामोशी की पुकार है  दुनिया

ख़ामोशी  की पुकार है  दुनिया। जीत होकर भी हार है दुनिया।   अपने मतलब से…

हमारे बारे में

हिंदी साहित्य की वाचक परंपरा कवि-सम्मलेन, जिसका उद्देश्य समाज का दर्पण होकर उसे उसके गुणों एवं अवगुणों से परिचित करवाते हुए एक उचित दिशा प्रदान करना है। कवि-सम्मलेन की ये परंपरा लम्बे समय से सामजिक चेतना का ये कार्य करती आ रही है। इसी परंपरा को सहेजने और संवारने का कार्य करने के उद्देश्य से हमने यह माध्यम तैयार किया है।

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