हे प्रभू

लालू, सतीश मुझको तू बलराम बना दे। तुझको कसम है शीला व सुखराम बना दे।…

कोरोना और पुलिस की लाठी

एक तरफ़ कोरोना, दूजे ओर पुलिस की लाठी। एक चुपके से वार करे वो खुलेआम…

एक चोर की प्रार्थना

अरे गोकुल के छोरे, सुनो नट नागर मोरे। माखन के चोर मोरे, सुनो चितचोर मोरे।…

हमारे बारे में

हिंदी साहित्य की वाचक परंपरा कवि-सम्मलेन, जिसका उद्देश्य समाज का दर्पण होकर उसे उसके गुणों एवं अवगुणों से परिचित करवाते हुए एक उचित दिशा प्रदान करना है। कवि-सम्मलेन की ये परंपरा लम्बे समय से सामजिक चेतना का ये कार्य करती आ रही है। इसी परंपरा को सहेजने और संवारने का कार्य करने के उद्देश्य से हमने यह माध्यम तैयार किया है।

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