मैं उस पर कविता लिखता हूँ उसको पता नहीं

भोली सी नादान वो लड़कीं उसकी ख़ता नही मैं उस पर कविता लिखता हूँ उसको…

एक दीपक मैं जलाऊँ, एक दीपक तुम जलाओ

एक दीपक मैं जलाऊँ, एक दीपक तुम जलाओ !!   तुम तमस में रोशनी हो…

कविता ज़िंदाबाद

कविता जिन्दाबाद हमारी कविता जिन्दाबाद !!   ये बोली  तो युग बोला  ये गायी तो …

मरते दम तक भी गाएंगे गाथा हिंदुस्तान की

मरते दम तक भी गाएंगे गाथा हिंदुस्तान की !!   उन्नत जहां ललाट किरीट का…

प्यासे प्यासे मेरे मछुआरे नयन

झुके कारे करारे शरारे नयन जैसे सागर में दो तैरती मछलियां प्यासे प्यासे मेरे मछुआरे…

जब तुम्हारी मांग में सिंदूर का टीका लगे

जब तुम्हारी मांग में सिंदूर का टीका लगे पांव में बिछिया ओ मेहंदी हाथ मे…

हमारे बारे में

हिंदी साहित्य की वाचक परंपरा कवि-सम्मलेन, जिसका उद्देश्य समाज का दर्पण होकर उसे उसके गुणों एवं अवगुणों से परिचित करवाते हुए एक उचित दिशा प्रदान करना है। कवि-सम्मलेन की ये परंपरा लम्बे समय से सामजिक चेतना का ये कार्य करती आ रही है। इसी परंपरा को सहेजने और संवारने का कार्य करने के उद्देश्य से हमने यह माध्यम तैयार किया है।

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