इक दिया उनका जला कर हो सके सम्मान रखना

देश के खातिर मरे जो देश के खातिर जिये। लड़ते रहे तूफान आंधी से बिना…

चिंतन (गीत)

बड़े  हुए  तो  पढ़  लिखकर  हम  ऐसे  दक्ष हुए,, सहज सरल जीवन के हम खुद…

बाहर तो गीत मल्हारें हैं पर भीतर बहुत उदासी है

बाहर  तो  गीत  मल्हारें  हैं  पर  भीतर बहुत  उदासी है। तन को तो सावन भिगो…

आँखें नम कर गया अचानक इक झोंका पुरवाई का

गाती  मुस्काती  बगिया  में  स्वर  गूँजा  शहनाई  का। आँखें नम कर गया अचानक इक झोंका…

धड़कन धड़कन उसकी ख़ातिर हो बैठी पागल

हृदय  द्वार  की  कोई   ऐसे  खटकाया  सांकल धड़कन धड़कन उसकी ख़ातिर हो बैठी पागल।  …

ऐ दूरभाष की सुविधाओं, मुझे वो चिठ्ठी लौटा दो

ऐ दूरभाष की सुविधाओं , मुझे वो चिठ्ठी लौटा दो ! फाड़ के फैंकी ,…

क्या तुम में पागल, वो लड़का, पहले सा अनाड़ी, अब भी है ?

क्या तुम में पागल ,वो लड़का ,पहले सा अनाड़ी ,अब भी है ? क्या मेरी…

बस नेह रहा, गई  देह प्रिये

निस्तेज हुए अब नैन तेरे ,वेणी में झलकते ,केश धवल ! मुस्कान की झीलें ,सूख…

जब तुम्हे आशा न होगी, तब मिलूँगा

बारिशें न मन छुएंगी , स्वप्न आना छोड़ देंगे ! पतझरों से दुःख न होगा…

पत्ते झरने लगे, बूढ़ा बरगद हुआ

पत्ते झरने लगे ,बूढ़ा बरगद हुआ – बस गई उम्र का आकलन रह गया !…

हमारे बारे में

हिंदी साहित्य की वाचक परंपरा कवि-सम्मलेन, जिसका उद्देश्य समाज का दर्पण होकर उसे उसके गुणों एवं अवगुणों से परिचित करवाते हुए एक उचित दिशा प्रदान करना है। कवि-सम्मलेन की ये परंपरा लम्बे समय से सामजिक चेतना का ये कार्य करती आ रही है। इसी परंपरा को सहेजने और संवारने का कार्य करने के उद्देश्य से हमने यह माध्यम तैयार किया है।

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