विकास बौखल
विकास बौखल
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विकास सिंह( बौखल)पुत्र श्री इन्द्रबहादुर सिंह ग्राम व पोस्ट सेमराय तहसील रामनगर जनपद  बाराबंकी उत्तर प्रदेश पिन 225202 शिक्षा स्नातक 2002 में बचपन से ही कविता कहानी का शौक बी0ए0प्रथम वर्ष से कविता लिखना और पढ़ना शुरू किया।20 वर्षों की काव्ययात्रा में लगभग 22 राज्यों में कव्यपाठ महाकवि काका हाथरसी,रमई काका,पण्डित छैल बिहारी बांण जैसे अनेक सम्मान प्राप्त ।अमर उजाला ,दैनिक जागरण,हिन्दुस्तान,प्रभात खबर,नई दुनिया जैसे  हिन्दी के प्रतिष्ठित अखबारों द्वारा आयोजित कविसम्मेलन एवं मुशायरों में कव्यपाठ।

क्या कहूँ इस दौर का इंसान कैसा हो गया है

क्या कहूँ  इस दौर  का  इंसान कैसा हो गया है। अब हवाओं का भी रुख तूफ़ान जैसा हो गया है।   बीस  दंगे  कत्ल बाइस  लूट की गिनती नही है, उसका भी सम्मान अब सम्मान जैसा हो गया है।  …

शौहर मेरे

इतने  ज्यादा हुस्न  से भरपूर  हैं शौहर मेरे। अपनी सुन्दरता में बिल्कुल चूर हैं शौहर मेरे।   कलमुँही जितनी हैं सबकी आँखों के तारे हैं वो, इस  लिए  मेरी  पकड़   से  दूर  हैं  शौहर  मेरे।   कोई कहता सेब हैं…

ख़यालों में मेरे उससे कोई बेहतर नहीं आता

न जाने क्या हुआ अब वो हमारे घर नही आता। ख़यालों में मेरे उससे कोई बेहतर नही आता।   बड़ी  ऊँची  हवेली  है, अमीरों  के  शहर  में है, कभी उसकी नज़र में अब मेरा छप्पर नही आता।   शिकारी हर…

कोरोना आ गया

उसकी हालत देख करके मुझको रोना आगया। यूँ  लगा  फिर  जैसे  कोई   जादू  टोना  आगया।   हमने पूछा नाक,मुँह दोनों ढके हो क्या हुआ, बोली  हमसे  भाग  बे   पीछे  कोरोना  आगया।   शँख,ताली,थाली,घण्टा खूब बजाया लोगों ने, हमने  भी  पीटा …

गज़ब के लोग हैं मेरी कमाई चाट लेते हैं

गज़ब  के  लोग  हैं  मेरी  कमाई  चाट लेते हैं। मेरे  हर  एक  रुपए  में  वो  पाई  काट लेते हैं।   के हम जनता हैं हक़ अपना कहाँ हम तक पहुँचता है, उसे  तो  रास्ते  में  बैठकर  सब  बाँट  लेते  हैं।…

चोरों में चौकीदार की इज्जत नहीं रही

उस नेक से किरदार की इज्जत नही रही। चोरों में चौकीदार  की  इज्जत  नही रही।   कुछ माननीय बिकने लगे जबसे यहाँ पर, सच मानिए बाज़ार  की इज्जत  नही रही।   मज़लूम,बेगुनाहों  पर  उठने  लगी  जबसे, इस दौर  में तलवार…

जीएसटी

सुबह सुबह पत्नी बोली आप तो मेरी हर अदा पर मरते हो। आज सही सही बताओ तुम मुझसे कितने परसेन्ट प्यार करते हो।   पत्नी की बात सुन कर मैं मन ही मन मुस्काया। मैं तुमसे बहत्तर परसेन्ट प्यार करता…

यमराज और कवि

तीन यमदूत एक कवि को न ढूंढ पाए, धर्मराज से कहा कि प्रभु आप जाइए। पूरा दिन ढूंढे हैं सुराग कोई मिला नही, ढूंढ के कहाँ से लाएं आप ही बताइए। कवि है बहुत होशियार कहीं छुप गया, ढूंढने का…

हमने कहा कि जय बोलो गऊ माता की

परिचय प्रथम कराया गुरु जी का तब, हमने कहा कि जय हो भाग्य निर्माता की। सास और ससुर को सामने जो लाया गया, एकाएक हम बोले जय हो पिता माता की। परिचय तीसरा कराया जब साले का तो, हमने कहा…

बाबा रामदेव बोले बूढ़ों को शिकायत है

बाबा रामदेव बोले बूढ़ों को शिकायत है, हम बाबा जी का च्यवनप्राश नही खाएंगे। साल भर हो गया मंगाते और खाते हुए, लाभ तो नही हुआ है अब न मंगाएंगे। मैने कहा बाबा एक बदलाव कर देखो, वही बूढ़े फिर…

हमारे बारे में

हिंदी साहित्य की वाचक परंपरा कवि-सम्मलेन, जिसका उद्देश्य समाज का दर्पण होकर उसे उसके गुणों एवं अवगुणों से परिचित करवाते हुए एक उचित दिशा प्रदान करना है। कवि-सम्मलेन की ये परंपरा लम्बे समय से सामजिक चेतना का ये कार्य करती आ रही है। इसी परंपरा को सहेजने और संवारने का कार्य करने के उद्देश्य से हमने यह माध्यम तैयार किया है।

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