तारिफ नियाज़ी
तारिफ नियाज़ी
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स्थान –रामपुर (उ.प्र) तारिफ नियाज़ी अंतरराष्ट्रीय उर्दू कवि और बॉलीवुड गीतकार जनाब ताहिर फ़राज़ के बेटे हैं। उन्होंने 4 साल की उम्र में अपना पहला शेर कहा था।वह एक बहुत प्रतिभाशाली कलाकार हैं जो एक पेशेवर उर्दू कवि, गीतकार और संगीतकार हैं। उनके कई गाने भारत और अन्य देशों के घोषित कलाकारों द्वारा सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर जारी किए गए हैं। वह प्रेम , प्रेमियों और सकारात्मकता के कवि हैं। उन्होंने अपनी कविताओं को उर्दू शायरी की शास्त्रीय शैली में लिखा है, जो कि मीर ताकी मीर स्कूल के माध्यम से उनके पास आ रहा है। वह पहले से ही उर्दू कविता के सभी किंवदंतियों, जैसे राहत इंदोरी, कुमार विश्वास, सुरेंद्र शर्मा, मुनव्वर राना, इकबाल अशर, नदीम फारुख, मंसूर उस्मानी और कई अन्य किंवदंतियों के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं। कविता के कई युवा पुरस्कारों के विजेता, उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है क्योंकि उन्होंने सबसे लंबे मुशायरे में भाग लिया था जो 102: 00 घंटे तक चला था। उन्होंने मुशायरों और कवि सम्मेलनों में भाग लेने के लिए दुबई, शारजाह, अबू धाबी, कतर, नेपाल, अल-ऐन और पूरे भारत की यात्रा की।

कागज़

दिल के बाते जो किया करता था प्यारा कागज़, बान गया गुज़रे ज़माने का फ़साना कागज़   मैनें चाहा था कलेजे से लगकर रख लूँ, उड़ गया वक्त की आंधी में दुलारा कागज़   एक नशा मुझे चढ़ते हुए महसूस…

दबे पांव गम भी आते हैं

कभी कभी उन्हे करना करम भी आते हैं सितम के वक़्त सही याद हम भी आते हैं   है राज़ क्या खुदा जाने मगर हक़ीक़त है कि मैकदे मे कयी मोहतरम भी आते हैं   वफ़ा की राह मे रखलो…

इश्क़ यार करता हूँ

गल्तियां बार बार करता हूँ क्या करूँ.. इश्क़ यार करता हूँ   बेवफ़ा से भी प्यार करता हूँ इश्क़ का कारोबार करता हूँ   जितनी बूंदे हैं देख दरया मे मे तुझे उतना प्यार करता हूँ   उजड़ी उजड़ी सी…

छत पर चाँद को पागल बनाए बैठा है

अन्धेरी रात में शम्मा जलाये बेठा है, वो मेरी याद की महफिल सजाये बैठा है   वो अपना हुस्न पे इत्न गुरूर करता है, की छत पर चाँद को पागल बनाए बैठा है   जो मेरे वासते हर रोज़ ही…

हाँ हमें आपसे मोहब्बत है

आज जो कुछ भी मेरी इज्ज़त है बस मेरे यार की बदोलत है   इश्क़ कर इश्क़ ऐ दिलले नादान इश्क़ सबसे बड़ी इबादत है   लीजये आज कह ही देते हैं हाँ हमे आपसे मोहब्बत है   जितना जी…

तेरे सर पर सवार है दुनिया

चार दिन की बहार है दुनिया, हसरतो का बाजार है दुनिया   तू कहाँ मेरी बाते समझेगा, तेरे सर पर सवार है दुनिया   ज़िन्दगी जीसपे चलती रहती है, ऐसी खंजर की धार है दुनिया   क्यूं चलाता है रात…

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