ताहिर फ़राज़
ताहिर फ़राज़
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उर्दू और हिंदी भाषा के कवि और गीतकार हैं जो अपनी भावनात्मक और रोमांटिक कविताओं के लिए जाने जाते हैं। एक कवि और गीतकार पिछले 50 वर्षों से उर्दू को संरक्षित कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में, वह अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। वह प्रेम के कवि, भावनाओं के कवि और जीवन के कवि हैं। वह अपनी ग़ज़ल में सबसे आसान शब्दों का इस्तेमाल करते हैं ताकि उनके संदेश को सबसे आसान तरीके से स्थानांतरित किया जा सके। उनका धार्मिक नाम कुछ ऐसा है जो व्यक्ति को दिल के भीतर रोता है। उनके द्वारा लिखी गई ग़ज़लों की नज़्मों और गीतों की भारी मात्रा मौजूद है जो पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं। यूएसए, यूके, यूएई, केएसए, ओमान, कुवैत, कतर, पाकिस्तान और नेपाल में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय और प्रमुख गायकों और संगीत निर्देशकों ने बड़ी मात्रा में परियोजनाओं के लिए उनके साथ काम किया है। उनके एल्बम HMV, T.Series, Sony जैसी सबसे प्रमुख संगीत कंपनियों द्वारा जारी किए गए हैं।

सभी को दाद देता है बड़ा चालाक शायर है

सभी  को दाद देता है बड़ा चालाक शायर है, फिर उसके बाद धीरे से अजि! क्या खाक शायर है   ग़ज़ल कहना ना कहना उसकी मरज़ी तुमसे क्या मतलब, बाहरी मेहफिल में तो वो साहिब-ए-इदराक शायर है,   ये बात…

कहीं जो धूप का साया मिले तो रुक जाऊँ

कहीं ख़ुलूस की ख़ुशबू मिले तो रुक जाऊँ मिरे लिए कोई आँसू खिले तो रुक जाऊँ   मैं उस के साए में यूँ तो ठहर नहीं सकता उदास पेड़ का पत्ता हिले तो रुक जाऊँ   कभी पलक पे सितारे…

वक़्त करता है ख़ुद-कुशी मुझ में

वक़्त करता है ख़ुद-कुशी मुझ में लम्हा लम्हा है ज़िंदगी मुझ में । सोने वाली समाअतो जागो ख़ामुशी बोलने लगी मुझ में । शुक्रिया ऐ जलाने वाले तेरा दूर तक अब है रौशनी मुझ में । रोज़ अपना ही ख़ून…

मुझ को पागल कहने वाला ख़ुद ही पागल हो जाएगा

कोई हसीं मंज़र आँखों से जब ओझल हो जाएगा मुझ को पागल कहने वाला ख़ुद ही पागल हो जाएगा   पलकों पे उस की जले बुझेंगे जुगनू जब मिरी यादों के कमरे में होंगी बरसातें घर जंगल हो जाएगा  …

अफ़्सोस ये है उस ने मिरी बात काट दी

गोशे बदल बदल के हर इक रात काट दी कच्चे मकाँ में अब के भी बरसात काट दी   वो सर भी काट देता तो होता न कुछ मलाल अफ़्सोस ये है उस ने मिरी बात काट दी   दिल…

आप के बस की बात नहीं

आप हमारे साथ नहीं चलिए कोई बात नहीं   आप किसी  के हो जाए आप के बस की बात नहीं   अब हमको आवाज़ ना दो अब ऐसे हालात नहीं   इस दुनिया के नक्शे में शहर है देहात नहीं,…

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हिंदी साहित्य की वाचक परंपरा कवि-सम्मलेन, जिसका उद्देश्य समाज का दर्पण होकर उसे उसके गुणों एवं अवगुणों से परिचित करवाते हुए एक उचित दिशा प्रदान करना है। कवि-सम्मलेन की ये परंपरा लम्बे समय से सामजिक चेतना का ये कार्य करती आ रही है। इसी परंपरा को सहेजने और संवारने का कार्य करने के उद्देश्य से हमने यह माध्यम तैयार किया है।

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