सुरेन्द्र यादवेन्द्र
सुरेन्द्र यादवेन्द्र
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जन्म स्थान : बारां ( राजस्थान) जन्म तिथि : 24.03.1963 पिता का नाम :श्री आर.एस. यादवेन्द्र माता का नाम : श्रीमती दुर्गावती शिक्षा : एम.कॉम ,D.Y.N.S. दिक्षा : किसी से नहीं ली     पिछले 25 वर्षों से अखिल भारतीय मंचों पर काव्य पाठ   विधा : हास्य व्यंग्य सम्मान : अखिल भारतीय टेपा सम्मान ,उज्जैन महामूर्ख सम्मेलन , जयपुर अट्ठहास ,गाज़ियाबाद जनता की पुकार , मुंबई साहित्य कला मंच ,मुंबई ठहाका, मुंबई आदि कई मंचों पर कई बार सम्मानित   इलेक्ट्रॉनिक मीडिया : NDTV पर ' अर्ज किया है' , वाह -वाह ,बहुत खूब , ZEE पर हास्य कवि मुकाबला में जज, ETV राजस्थान ,star tv आदि कई चैनलों पर प्रस्तूति विदेश यात्रा : दुबई , मस्कट , शारजहां, अभिनय : ' फ़िल्म पापा तुम कहाँ हो ' टेली  फ़िल्म   प्रकाशन : प्रथम पुस्तक आपके हाथ में द्वितीय प्रेस में पता : संजीवनी मेडिकल , पीली कोठी ,अस्पताल रोड , बारां(राज.) आईये मित्रो आपको परिचय कराते है  अंतर्राष्ट्रीय हास्य व्यंग्य कवि दद्दा सुरेंद्र यादवेंद्र जी से आपका जन्म 24.03.1963 को बारां ( राजस्थान) में हुआ आपके पिता श्री आर. एस. यादवेंद्र ,माता श्रीमती दुर्गावती ,शिक्षा - एम० कॉम० ,D.Y.N.S सुरेंद्र यादवेंद्र जी प्रारंभ से ही माँ सरस्वती के पुजारी रहे हैं जिन्हें किसी से दीक्षा लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी लगातार तीस वर्षों से अखिल भारतीय मंचों पर काव्य पाठ कर रहे हैं आप हास्य व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर रहे हैं हिंदी कविता में हमेशा फूहड़ता ,अश्लीलता दो अर्थी कविता के विरोधी रहे हैं अपनी कविता में कभी व्याकरण से समझौता नहीं किया सम्मान की द्रष्टि से यदि देखा जाये तो दद्दा को अखिल भारतीय टेपा  सम्मान ,उज्जैन महा मूर्ख सम्मेलन ,जय पुर अट्टहास गाजियाबाद, जनता की पुकार ,मुंबई साहित्य कला मंच ,मुंबई ठहाका,तमाम मंचों पर कई बार  सम्मानित इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मे भी आपका विशेष स्थान  रहा है N.D.T.V पर अर्ज  किया है ,वाह वाह बहुत खूब,Zee Smile हास्य मुकाबला में  जज ,E.T.V राजस्थान ,Star TV आदि कई चैनलों पर प्रस्तुति दुबई ,मस्कट,शारजहाँ कई विदेश यात्रा भी की गयीं है अभिनय में  भी आपकी भूमिका कम नही रही है फिल्म पापा तुम कहां हो टेली फिल्म आपकी कई पुस्तकें आ चुकी हैं आज भी श्रोताओं को अपने छंदों द्वारा हँसने हँसाने का अदम्य क्षमता रखने वाले दादा सुरेंद्र यादवेंद्र को  22 सितंबर को मुम्बई में मनहर ठहाका पृरुस्कार 2019  मिलने जा रहा है जिसमे 51 हजार रु नकद शॉल श्री फल स्मृति चिन्ह व प्रशाति पत्र व हास्य सम्राट की उपाधि दी जाएगी।

गुरुजी की क्लास

भ्रष्टाचार रोकने को आयोग बिठाया गया, आयोग ने योग दान  दिया भ्रष्टाचार में।   आयोग की जांच करने को कमेटी बिठाई , कमेटी ने ऐंठ ली रकम शिष्टाचार में।   कमेटी के ऊपर बिठाया जांच कमीशन, कमीशन, कमीशन खा गया…

तुम पर गज़ल कहूँ के तुमको गज़ल कहूँ

1.   पलकों को नम कहूँ कि आँखें सजल कहूँ। अधरों को गुलाब या खिलता कमल कहूँ। उलझा हूँ कब से उलझी हुई जुल्फों में , तुम पर गज़ल कहूँ के तुमको गज़ल कहूँ।   2.   आओ फिर से…

उधार का कभी व्यवहार नहीं रखना

गुरुजी बोले कि बेटा टूटा हुआ दरपन बंद  घड़ी घर की दीवार नहीं रखना ।   याद रखो एक बात संकट में छोड़े साथ हाथ में कभी वो हथियार नहीं रखना ।   धन वाले ऋण का न लेन देन…

प्रेमिका ने किया ब्लॉक

प्रथम प्रपोज में ही हुए होज पोज हम प्यार का इरादा पूरा खाक कर दिया है।   भाई साब भैय्या जी व अंकल जी बोल बोल नाज़ुक नरम दिल शॉक कर दिया है।   फेसबुक वाट्सऐप   पर न मेसेज कोई…

प्रेम की अर्थव्यवस्था (छंद)

प्रेमी बोला डार्लिंग डॉलर सी फूल रही मेरा हाल भारतीय रुपैये सम्मान है।   बिछाने को धरती पे अखबार बस यार ओढ़ने के नाम पर खुला आसमान है ।   लंच आश्वासन का डिनर में भाषण है ब्रेकफास्ट पै है…

कुंवारे प्रेमी की पीड़ा

तुम्हारे तो भाव काजू  बादाम से बढ़ गए छुंआरे थे तो हम छुंआरे रह गये हम।   तुम्हारी तो किस्मत जोर मार गई जानू किस्मत के मारे थे मारे रह गये हम   तुमने तो घर बार अपना बसा लिया…

कोरोना वायरस (छंद)

एक वायरस ने ही जीवन नीरस  किया सारा रस जीवन का नाली में फिका दिया।   मौत तक मेड इन चाईना हो गई यार दीवारों पे इश्तहार जग में लिखा दिया ।   ऐसा ढाया कहर कि कोरोना ने सबको…

अपराध रोकने की कोशिशें (छंद)

अपराध रोकने की कोशिशें हज़ार हुई रोके नहीं रुके  और ज्यादा बढ़ गए  हैं।   अपराधी पकड़ने गये थे पुलिस वाले खुद अपराधियों के हत्थे चढ़ गए हैं।   मढ़ने चले थे दोष दूसरों के माथे पर हाय हाय खुद…

दूर मुँह से हुये निवाले हैं

दूर मुँह से हुये निवाले हैं पड़ गये ज़िन्दगी के लाले हैं।   हर तरफ़ काल का अँधेरा है, सहमे  सहमे हुए उज़ाले हैं।   ज़िंदगी दाव पर लगी सारी, पासे शकुनि ने जो उछाले हैं ।   लेके फरियाद…

ऐ दिलो जान मेरी जान बचाने आजा

ऐ दिलो जान मेरी जान बचाने आजा। आज झूँठा हि सही प्यार जताने आजा ।   ग़म ज़दा और परेशान हूँ जाने जाना। प्यार का गीत कोई मुझको सुनाने आजा ।   फासले क्यूँ  हुए ये राज बताने लिये। मेरे…

हमारे बारे में

हिंदी साहित्य की वाचक परंपरा कवि-सम्मलेन, जिसका उद्देश्य समाज का दर्पण होकर उसे उसके गुणों एवं अवगुणों से परिचित करवाते हुए एक उचित दिशा प्रदान करना है। कवि-सम्मलेन की ये परंपरा लम्बे समय से सामजिक चेतना का ये कार्य करती आ रही है। इसी परंपरा को सहेजने और संवारने का कार्य करने के उद्देश्य से हमने यह माध्यम तैयार किया है।

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