डॉ. सरिता शर्मा
डॉ. सरिता शर्मा
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पूर्व सलाहकार संस्कृति मंत्रालय, राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त, पूर्व अध्यक्ष भारतेंदु नाट्य अकादमी, पिता का नाम- स्व श्री निरनाम दत्त शर्मा जन्मतिथि - 29 जुलाई शिक्षा - पीएचडी पता - एक्स 802, आम्रपाली सफायर, सेक्टर - 45, नोइडा (उत्तर प्रदेश) प्रकाशित संकलन - 1- पीर के सातों समन्दर(गीत संग्रह) 2- नदी गुनगुनाती रही (गीत संग्रह) 3- हुए आकाश तुम (गीत संग्रह) 4- तेरी मीरा ज़रूर हो जाऊं (मुक्तक संग्रह) 5- चाँद, मुहब्बत और मैं (ग़ज़ल संग्रह) ऑडियो सी डी - 1 रात भर चाँद सोता रहा 2 गीत बंजारन के इसके अतिरिक्त बहुत से पत्र पत्रिकाओं में कविता/संस्मरण/लेख आदि समय समय पर प्रकाशित। विशेष- कन्या भ्रूण हत्या विषयक गीत पाठ्य पुस्तक में सम्मिलित। भारतीय सांस्कृतिक परिषद (ICCR) द्वारा इंग्लैंड के अनेक नगरों में तथा विश्व हिंदी सम्मेलन, भोपाल व विश्व हिंदी सम्मेलन मॉरीशस में काव्य पाठ हेतु भेजा गया। अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा अमेरिका, इंग्लैंड तथा खाड़ी देशों में काव्यपाठ हेतु अनेकानेक अवसरों पर आमंत्रित किया गया। अत्यंत प्रतिष्ठित "लाल किला कवि सम्मेलन" में अनेक बार काव्य पाठ। अनेक टी वी चैनलों, आकाशवाणी आदि से महत्वपूर्ण अवसरों पर काव्यपाठ। कविता लेखन हेतु महादेवी वर्मा सम्मान, निराला सम्मान, यश भारती पुरस्कार, छत्तीसगढ़ निधि सम्मान तथा बृज कोकिला की उपाधि सहित देश विदेश के अनेक सम्मान/पुरस्कार प्राप्त। हिंदी की छंद बद्ध कविता के वर्तमान कवियों में डॉ सरिता शर्मा का नाम अग्रगण्य है। उनका जन्म भिलाई नगर में एक साधारण परिवार में हुआ। भिलाई नगर के कल्याण महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एम ए तथा पी एच डी की पढ़ाई अम्बेडकर विश्व विद्यालय आगरा से पूरी की। सरिता शर्मा को बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा जो समय के साथ बढ़ता ही गया। उनके 7 काव्य संकलन प्रकाशित हुए हैं। कन्या भ्रूण हत्या पर लिखा उनका गीत मुम्बई विश्वविद्यालय की स्नातक की पाठ्य पुस्तक में वर्ष 2017 में सम्मिलित किया गया। उनकी रचनाओं पर आगरा विश्वविद्यालय में किये गए शोध पर उपाधि प्रदान की जा चुकी है। डॉ सरिता शर्मा गणतन्त्र दिवस के अवसर पर होने वाले #ऐतिहासिक लाल किला सम्मेलन में 15 बार से भी अधिक सम्मिलित होने वाली भारत की एकमात्र कवयित्री हैं। उन्हें भारत मे महादेवी वर्मा सम्मान नर्मदा सम्मान ब्रिज कोकिला उपाधि निराला सम्मान आदि लगभग 50 से अधिक सम्मानों के साथ उत्तर प्रदेश सरकार का सर्वाधिक प्रतिष्ठित 11 लाख रुपये की राशि का "यश भारती" सम्मान प्राप्त हुआ। केंद्र सरकार के उपक्रम ICCR की तरफ से उन्हें 2 बार ब्रिटेन के अनेक शहरों में हिंदी कविता तथा भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार हेतु सांस्कृतिक दूत बनाकर भेजा गया। वे UAE,  AMERICA सहित अनेक देशों में काव्य पाठ के लिए अनेक बार आमन्त्रित तथा सम्मानित की गई हैं। उनकी साहित्य सेवा और भारतीय संस्कृति में गहरी पैठ के चलते उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें "संस्कृति सलाहकार" तथा भारतेंदु नाट्य अकादमी की अध्यक्ष मनोनीत किया। उनकी कविताएं अनेक TV चैनल समेत पत्र - पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित  होती रही हैं। अनेक समाचार पत्र, पत्रिकाओं में उनके लेख कविता कहानी प्रकाशित होते रहे हैं।

हम अलमस्त फकीर हमारा क्या कहना

हम अलमस्त फकीर हमारा क्या कहना तुलसी सूर कबीर हमारा क्या कहना धड़कन धड़कन मस्त कबीरी धुन गाये हंसा लहर-लहर लहरों पर लहराये मन गंगा का नीर हमारा क्या कहना हर चेहरा एक किस्सा एक कहानी है अपनी दुनिया तो…

आग पानी गा रही हूं

ढाल कर गीतों में जीवन की कहानी गा रही हूं फूल कांटे चुन रही हूं, आग पानी गा रही हूं। मोड़ पर थमकर खड़ी हूं याद की गठरी सम्भाले ज़िन्दगी भर साथ घूमे कुछ अंधेरे कुछ उजाले धूप के तेवर…

सरिता

निरन्तर चल रही हूं मैं जहां जैसी मिली राहें उन्हीं में ढल रही हूं मैं। किसी पर्वत के अंतर में छिपी बन नीर का सोता मिली जो सन्धि पत्थर में वहीं उद्गम मेरा होता उछलती चल पड़ी नीचे बढ़ाया वेग…

हमारे बारे में

हिंदी साहित्य की वाचक परंपरा कवि-सम्मलेन, जिसका उद्देश्य समाज का दर्पण होकर उसे उसके गुणों एवं अवगुणों से परिचित करवाते हुए एक उचित दिशा प्रदान करना है। कवि-सम्मलेन की ये परंपरा लम्बे समय से सामजिक चेतना का ये कार्य करती आ रही है। इसी परंपरा को सहेजने और संवारने का कार्य करने के उद्देश्य से हमने यह माध्यम तैयार किया है।

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