पंकज प्रसून
पंकज प्रसून
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पंकज प्रसून एक युवा कवि हैं, जो अपने व्यावहारिक लेखन के लिए जाने जाते हैं यानी कविताएँ, व्यंग्य, स्तंभ लेख और बलात्कार आदि। पंकज प्रसून वर्तमान मामलों, सामाजिक-राजनीतिक व्यंग्य और हास्य विज्ञान कविता जैसे विषयों पर एक विशेषज्ञ लेखक हैं।   पुरस्कार -   डॉ। रांगेय राघव द्वारा उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, उत्तर प्रदेश सरकार, 2015   उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा के एन भाल पुरस्कार, यूपी सरकार, 2017   छुपा रुस्तम पुरस्कार- वाह वाह क्या बात है, SAB TV, 2013 अखिल भारतीय सर्व समाज समिति, नोएडा, 2020 द्वारा विंजय विभोषण सम्मान   वाग्धारा, मुंबई 2020 द्वारा यंग अचीवर अवार्ड   के पी सक्सेना वांग्य सम्मान, रीड पब्लिकेशन, प्रयागराज, 2020 द्वारा   उत्कृष्ट युवा पुरस्कार जनशरणम, नई दिल्ली, 2017 द्वारा   विवेकानंद युवा सम्मान, गाइड समाज कल्याण संस्थान, लखनऊ, 2019 द्वारा     नसीम अख्तर सिद्दीकी अवार्ड, नसीम अख्तर सिद्दीकी अकादमी, लखनऊ, 2015 द्वारा सत्यपथ, लखनऊ, 2016 द्वारा हस्तक्षेत्र इंडिया अवार्ड   विकास आईएएस सोसाइटी, लखनऊ, 2016 द्वारा अस्तित्व सम्मान   11- लखनऊ महोत्सव, 2013 द्वारा युवा रत्न पुरस्कार   Publications- "द लंपतगंज" 1 संस्करण (2019), प्रकाशक: डायमंड बुक्स, आईएसबीएन 9352967925 आईएसबीएन 978-9352967926   "जनहित में जारी", प्रकाशक: हिंद युग, आईएसबीएन ९ ३75१३ ९ ४it५ एक्स आईएसबीएन ९-94- ९ ३5१३ ९ ४9५   "परमानु की छांव में", प्रकाशित: मित्तल एंड सन्स "पंच प्रपंच" संपादक: सुशील सिद्धार्थ, लेखक: पंकज प्रसून, प्रकाशित: अयान प्रकाशन (2017), आईएसबीएन 978-81-7408-967-0   सुशील सिद्धार्थ द्वारा संपादित "वांगय्या बत्तीसी", लेखक: पंकज प्रसून, वनिका प्रकाशन, आईएसबीएन 978-81-93285-25-1   प्रेम जनमेजय द्वारा संपादित "हंसते हुए सोना रोना" लेखक: पंकज प्रसून, संजना प्रकाशन, आईएसबीएन 978-81-92955-93-3   "सुशील से सिद्धार्थ टाक" राहुल देव द्वारा संपादित, लेखक: पंकज प्रसून, वनिका प्रकाशन, आईएसबीएन 978-93-86436-45-0   "वांगयकरन का बच्चन" सुशील सिद्धार्थ द्वारा संपादित, लेखक: पंकज प्रसून, वनिका प्रकाशन, आईएसबीएन 978-93-86436-29-0     प्रदर्शन- भारत के सभी प्रमुख शहर, संयुक्त राज्य अमेरिका, दुबई, नेपाल आदि   टीवी शो   कवि सम्मेलन - आजतक   वाह वाह क्या बात है - सोनी सब   लापेटे में नेताजी -न्यूज़ 18 इंडिया   मजाहिया मुशायरा - न्यूज 18 उर्दू   रंग बरसे - आजतक   वन्स मोर - DDUP   कवि गोष्ठी - डीडी नेशनल   होली स्पेशल - लाइव टुडे   काव्य पथ - इंडिया टी.वी.   महफिल -नेशनल वॉयस टीवी शो     कवि सम्मेलन - भारत सम्मान   अन्य उपलब्धियां -   1500 से अधिक लाइव शो किए।   प्रसून को इंडिया टुडे के शीर्ष 30 युवा आइकन के लिए 2019 में 30 नामित युवाओं के साथ कला और संस्कृति के क्षेत्र में चुना गया था। (https://aajtak.intoday.in/story/pankaj-prasoon-humorist-lucknow-interlude-1-1142489.html) भारत में विज्ञान कवि सम्मेलन का पायनियर एशिया में पंकज प्रसून ने परमाणु ऊर्जा पर अपनी पहली कविता पुस्तक रिकॉर्ड होल्डर के लिए बुक की। लाल किला कवि सम्मेलन और विभिन्न भारतीय मंत्रालयों में प्रदर्शन किया गया।

चंद मुक्तक

किसी के इश्क़ ने क़िस्मत सँवार कर रख दी हमने जीती हुई बाज़ी भी हारकर दख दी टूटते घर को बचाने के लिए बाप ने फिर बेटे के पैरों में पगड़ी उतार कर रख दी     दिल के बहलाने…

सपने हकीकत से ज्यादा हसीन होते हैं

पाश तुमने ठीक ही कहा था… कभी मैं सपना देखता था कि जब जोरों की गर्मी होगी सब कुछ तप रहा होगा तब मैं लंबी सी कार में एसी फुल करके फुल वॉल्यूम में म्यूजिक चला कर भरी गर्मियों में…

मेरे नाम के सम्मान के लिए अप्लाई करें

मैं अपने नाम से सम्मान शुरू करना चाहता हूँ जीते जी अमर होना चाहता हूँ आप ही बताइये मैं सम्मान के लिए मरने का इंतजार क्यों करूँ मेरे बच्चे बेरोजगार हैं वो मुझे अमर बनाएंगे,संदेह है चेले चापड़ आत्ममुग्ध हैं…

पढ़ाकू बनाम लड़ाकू

पहले मैं और वो दोनों गरीबी रेखा के नीचे और भैंस के ऊपर बैठा करते थे हम दोनों खेला करते थे सुरबग्घी आइस पाइस वह हर बार जीतता था मैं हारता था मैं पढ़ाकू था वह लड़ाकू था मैं पढाई…

गड्ढा गान

ज़ख्म भर जाएंगे सारे मैं नही भर पाउँगा मैं हूँ गड्ढा गीत जीवटता के अपने गाऊंगा   जिंदगी का सारा करटक मेरे अंदर फेंकना जब घटा छट जाए तो आंखों के नीचे देखना मैं हूँ अनगढ़ पर मेरा भूगोल है…

ईमानदार आदमी अव्वल दर्जे का बेवकूफ होता है

ईमानदार आदमी अव्वल दर्जे का बेवकूफ होता है   एक ईमानदार आदमी सबसे बड़ा आत्मघाती होता है कुल्हाड़ी मारता है खुद  के पैरों पर उसका स्वाभिमान ही उसका दुश्मन होता है वह दूर हो जाता है परिवार और मित्रों से…

लेकिन तुम देश से प्रेम नहीं करते

मैंने कहा ‘मैं अपनी माँ से प्रेम करता हूँ, परिवार से प्रेम करता हूँ वह बोले ‘लेकिन तुम  देश से प्रेम नही करते’ मैंने कहा ‘मैं जसप्रीत,फर्नांडीज, फिराक सबसे प्रेम करता हूँ’ वह फिर बोले ‘लेकिन तुम देश से प्रेम…

ब्रेक अप के बाद का प्यार

ब्रेक अप के बाद का प्यार कि जैसे बारिश के एहसास के लिए तपिश जरूरी है छाँव के  एहसास के लिए धूप जरूरी है मिलन के  एहसास के लिए जुदाई जरूरी है संभलने के  एहसास के लिए गिरना जरूरी है…

लड़कियां बड़ी लड़ाका होती हैं

मैंने देखा एक लड़की महिला सीट पर बैठे पुरुष को उठाने के लिए लड़ रही थी तो दूसरी लड़की महिला – कतार में खड़े पुरुष को हटाने  के लिए लड़ रही थी   मैंने दिमाग दौड़ाया तो हर ओर लड़की…

हमारे बारे में

हिंदी साहित्य की वाचक परंपरा कवि-सम्मलेन, जिसका उद्देश्य समाज का दर्पण होकर उसे उसके गुणों एवं अवगुणों से परिचित करवाते हुए एक उचित दिशा प्रदान करना है। कवि-सम्मलेन की ये परंपरा लम्बे समय से सामजिक चेतना का ये कार्य करती आ रही है। इसी परंपरा को सहेजने और संवारने का कार्य करने के उद्देश्य से हमने यह माध्यम तैयार किया है।

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