दिलीप शर्मा
दिलीप शर्मा
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कवि दिलीप शर्मा  आकाशवाणी से शुरुवात. छोटे मंचो से लेकर सीधे पुणे फेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित मंच पर अपनी प्रस्तुति । उसके बाद देश भर के सारे ख्याति प्राप्त कवियों के संग देश के बड़े शहरों में अपनी सफल प्रस्तुति। पुणे के लिए एक जाना माना नाम और पूरे देश मे पुणे का परचम लहराने का सौभाग्य। महाराष्ट्र साहित्य अकादमी द्वारा पहली किताब प्यासा पानी प्रकाशित । Etc चेनल, के अंगूर , सब टीवी में वाह वाह ,दबंग चेनल पर अपनी प्रस्तुति । पुणे के अग्रवाल समाज का 20 साल से सफल संयोजन  । लायन्स, रोटरी जैन सोशल, उमेद परिवार, जैसि संस्थाओं के फंड रीजन हेतु सफल संयोजन। बिहार के 9 शहरों में श्रृंखला बद्ध प्रतिष्ठित पेपर के प्रोग्राम में काव्यपाठ । पुणे के आज का आनंद जैसे हिंदी के प्रतिष्ठित पेपर में लगातार अपनी कविताएं प्रकाशित होना। भक्ति संगीत में अपनी विशेष पहचान। जैन भक्ति संगीत एक कैसेट प्रकाशित।

बेगुनाह

निर्दोष है मेरा रास्ता मंज़िल भी देख रहा हूं पर जहां से शुरू कर रहा हूं वहीं खुद को पा रहा हूं   मंज़िल मिलना तो दूर रास्ता भी मुश्किल कर दिया जो गुनाह मैंने किऐ ही नहीं उसी की…

मीत

मेरे मीत मेरे ज़ख्मों को मत कुरेदो क्योंकि इनमें से बहुत से घाव ऐसे हैं जो मेरे नही हैं जिन्हें मैं नहीं जानता और मीत कही ऐसा ना हो , कि ढूंढते -ढूंढ़ते तुम्हें कुछ घाव ऐसे भी नज़र आयें…

नमक हरामी

उनकी पहचान बनाते बनाते मैंने अपनी पहचान खो दी और शायद यही वजह रही होगी की अब वे मुझे पहचाने से इनकार करते हैं! दिलीप शर्माकवि दिलीप शर्मा  आकाशवाणी से शुरुवात. छोटे मंचो से लेकर सीधे पुणे फेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित…

दुश्मनी

मैंने अपने दिल की दास्तां सुनाई वो मेरी कमज़ोरी पर हंसकर महफ़िल से मेरे सारे दुश्मन उठ कर चले गए मेरे मित्रों ने मुझे सांत्वना देकर सुलाया और मेरा घर लूटकर चले गए ! दिलीप शर्माकवि दिलीप शर्मा  आकाशवाणी से…

सोच

तूफ़ान कहां से उठा यह कोई  नहीं सोचता क्योंकि तूफ़ान उसे सोचने का मौका ही नही देता ! दिलीप शर्माकवि दिलीप शर्मा  आकाशवाणी से शुरुवात. छोटे मंचो से लेकर सीधे पुणे फेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित मंच पर अपनी प्रस्तुति । उसके…

अभिमन्यु

सारे हादसों ने घेरकर मुझे मारने की ठान ली , मेरे अभिमन्यु होने का इससे सबको पता चल गया! दिलीप शर्माकवि दिलीप शर्मा  आकाशवाणी से शुरुवात. छोटे मंचो से लेकर सीधे पुणे फेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित मंच पर अपनी प्रस्तुति ।…

सच्चाई

सत्य अकेला ही जा रहा था अपने पथ पर अस्तयों ने घेरकर उसे अभिमन्यु बना दिया ग़म सत्य के मरने का नहीं इस बात का था कि कौरवों के साथ मिलकर पांडवों ने भी जश्न मना लिया! दिलीप शर्माकवि दिलीप…

आदत

मैं इन हालात की ठोकरों का इतना आदि हो चुका हूं   कि अब न लगे ठोकर तो ख़ून निकलता है ! दिलीप शर्माकवि दिलीप शर्मा  आकाशवाणी से शुरुवात. छोटे मंचो से लेकर सीधे पुणे फेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित मंच पर…

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