अखिलेश द्विवेदी
अखिलेश द्विवेदी
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नाम- अखिलेश चंद्र जन्म की तारीख - 01-12-1957 आयु - 63 पेशा - अधिवक्ता। इलाहाबाद में पैदा हुए। हमेशा संगीत में रुचि थी। युवावस्था में कुछ समय के लिए विभव भारती से जुड़े थे। त्योहारों में स्थानीय स्टेज शो के लिए नाटक लिखना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने लेखन में रुचि विकसित की। 2010 से वह कवि सम्‍मेलन और कविता पाठ के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं।

हे प्रभू

लालू, सतीश मुझको तू बलराम बना दे। तुझको कसम है शीला व सुखराम बना दे।   संसद की शोभा गर यहां फूलन से बढ़ रही। मुझको मेरे भगवान तू मलखान बना दे।   चरणों की अपने भक्ति ऐसी देना हे…

कोरोना और पुलिस की लाठी

एक तरफ़ कोरोना, दूजे ओर पुलिस की लाठी। एक चुपके से वार करे वो खुलेआम लठियाती।   एक गले मिलने से अपना दुष्प्रभाव दिखलाती। दूजी पड़ती है शरीर पर नानी याद दिलाती।   छोटे-बड़े, धनी और निर्धन का मतभेद मिटाती।…

एक चोर की प्रार्थना

अरे गोकुल के छोरे, सुनो नट नागर मोरे। माखन के चोर मोरे, सुनो चितचोर मोरे। अरे ओ नंदकिशोरे, आया मैं द्वार तोरे। मेरी बिगड़ी बना दे, मुझमे वो हुनर ला दे। चोरों की लिस्ट में, सबसे ऊपर बिठा दे।  …

हमारे बारे में

हिंदी साहित्य की वाचक परंपरा कवि-सम्मलेन, जिसका उद्देश्य समाज का दर्पण होकर उसे उसके गुणों एवं अवगुणों से परिचित करवाते हुए एक उचित दिशा प्रदान करना है। कवि-सम्मलेन की ये परंपरा लम्बे समय से सामजिक चेतना का ये कार्य करती आ रही है। इसी परंपरा को सहेजने और संवारने का कार्य करने के उद्देश्य से हमने यह माध्यम तैयार किया है।

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